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परंपरा, प्रतिष्ठा और खेल संस्कृति की पहचान बनी केरीबंधा कबड्डी प्रतियोगिता

अनेक मंत्री कर चुके हैं शिरकत, अब भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव के आगमन से प्रतियोगिता को मिलेगी नई पहचान

सक्ती जिले की खेल परंपरा में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुकी केरीबंधा कबड्डी प्रतियोगिता वर्षों से ग्रामीण खेल संस्कृति, युवाओं की प्रतिभा और पारंपरिक खेलों के संरक्षण का सशक्त मंच रही है। यह प्रतियोगिता केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बन चुकी है, जिसमें पूर्व में कई मंत्री, जनप्रतिनिधि एवं विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति इसकी प्रतिष्ठा को और मजबूत करती रही है।

इस वर्ष प्रतियोगिता के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव के केरीबंधा आगमन से प्रतियोगिता को राष्ट्रीय स्तर की नई पहचान मिलने की उम्मीद है। उनका आगमन न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाएगा, बल्कि केरीबंधा कबड्डी प्रतियोगिता को प्रदेश और देश के खेल मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करेगा।

इस प्रतिष्ठित आयोजन को निरंतर ऊँचाइयों तक पहुँचाने में विद्या सिदार का समर्पण और सतत प्रयास सराहनीय रहा है। उनके नेतृत्व और मेहनत से केरीबंधा कबड्डी प्रतियोगिता आज क्षेत्र में पारंपरिक खेलों की पहचान बन चुकी है। ग्रामीण युवाओं को मंच प्रदान करने, खेल प्रतिभाओं को आगे लाने और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेल को जीवंत बनाए रखने में उनका योगदान क्षेत्र में मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

केरीबंधा कबड्डी प्रतियोगिता के माध्यम से न केवल खेल प्रतिभाओं को अवसर मिल रहा है, बल्कि ग्रामीण अंचल में खेल के प्रति जागरूकता, अनुशासन और आपसी भाईचारे का भी संदेश जा रहा है। आयोजन से जुड़े लोगों का मानना है कि इस तरह के आयोजन युवाओं को नशा, भटकाव और नकारात्मक गतिविधियों से दूर रखकर सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रतियोगिता को लेकर क्षेत्र में खासा उत्साह देखा जा रहा है। खिलाड़ियों के साथ-साथ खेल प्रेमी दर्शक भी इस आयोजन को लेकर उत्साहित हैं। आयोजन समिति को विश्वास है कि इस वर्ष का आयोजन ऐतिहासिक और यादगार सिद्ध होगा तथा केरीबंधा कबड्डी प्रतियोगिता की पुरानी प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।

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