सक्ती, सक्ती जिला अंतर्गत ग्राम पंचायत झालरौंदा के ग्रामीण लंबे समय से सड़क की बदहाली और कीचड़ की समस्या से जूझ रहे हैं। गांव की मुख्य सड़क पर पसरे कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों के कारण महिलाओं, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को आवाजाही में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। शासन-प्रशासन और जन प्रतिनिधियों से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब समस्या का कोई समाधान नहीं निकला, तो ग्रामीणों ने स्वयं ही सड़क की सूरत बदलने का बीड़ा उठाया है।
चंदा एकत्र कर शुरू किया सड़क निर्माण कार्य
प्रशासनिक उपेक्षा से हतोत्साहित होने के बजाय झालरोदा के समस्त ग्रामवासियों ने एकजुट होकर जनसहयोग की मिसाल पेश की है। गांव के प्रत्येक घर से चंदा एकत्रित कर राशि जुटाई जा रही है। इस एकत्रित राशि से मुरम, गिट्टी और आवश्यक सामग्री मंगवाकर सड़क को चलने योग्य बनाने का कार्य ग्रामीणों द्वारा श्रमदान के माध्यम से तेजी से किया जा रहा है।
बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को हो रही थी भारी परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के दिनों में सड़क पर इतना कीचड़ हो जाता है कि पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। सबसे ज्यादा दिक्कत इमरजेंसी के समय मरीजों को अस्पताल ले जाने, छोटे बच्चों को स्कूल जाने तथा बुजुर्गों को आवागमन में होती थी। कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। बार-बार मांग पत्र सौंपने के बाद भी जब अधिकारियों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर नहीं गया, तब गांव वालों ने मिलकर यह कदम उठाने का निर्णय लिया।
ग्रामीणों ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार एक तरफ विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ झालरोदा जैसे गांव आज भी बुनियादी सड़क सुविधा के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों ने जनसहयोग से सड़क को सुधारने का काम तो शुरू कर दिया है, लेकिन साथ ही शासन-प्रशासन से मांग की है कि गांव की इस प्रमुख समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण स्वीकृत किया जाए, ताकि लोगों को स्थाई राहत मिल सके।
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