छत्तीसगढ़सक्तीसमाजिक

ढोल-मांदर की थाप पर थिरका सक्ती, आदिवासी समाज की महारैली ने बिखेरा संस्कृति का रंग

हजारों समाजजनों की ऐतिहासिक भागीदारी

कर्मा नृत्य ने जीता नगरवासियों का दिल; जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत

सक्ती , विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सर्व आदिवासी समाज की ओर से निकाली गई भव्य आदिवासी महारैली ने रविवार को सक्ती नगर को आदिवासी संस्कृति और एकजुटता के रंग में रंग दिया। हजारों की संख्या में समाजजन महारैली में शामिल हुए। ढोल-मांदर की गूंज, पारंपरिक वेशभूषा और कर्म नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने पूरे नगर का माहौल उत्सवमय बना दिया। महारैली नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेडियम पहुंची, जहां इसका भव्य कार्यक्रम में समापन हुआ।

जहां से गुजरी महारैली, वहीं उमड़ा जनसैलाब :-

महारैली के दौरान नगर के प्रमुख मार्गों पर जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा और स्वागत कर समाजजनों का उत्साह बढ़ाया। रैली को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे। पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुषों और युवाओं की टोली ने अपनी संस्कृति की शानदार प्रस्तुति देकर सभी का ध्यान आकर्षित किया।

महारैली में शामिल जिला पंचायत सभापति एवं आदिवासी समाज की प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती विद्या सिदार सहित समाजजनों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का संदेश दिया। रैली में शामिल विभिन्न टोलियों के साथ बजते ढोल-मांदर की थाप और पारंपरिक गीतों ने पूरे शहर को आदिवासी संस्कृति के रंग में रंग दिया।।    

image editor output image 1271952248 17862944313898266935484917856080 kshititech

कर्मा नृत्य ने जीता नगरवासियों का दिल :-

महारैली का सबसे बड़ा आकर्षण कर्म नृत्य रहा। पारंपरिक वेशभूषा में महिला-पुरुषों और युवाओं की टोली ने ढोल-मांदर की थाप पर कर्म नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। नृत्य की लय और पारंपरिक अंदाज ने राहगीरों और नगरवासियों को अपनी ओर आकर्षित किया। कई स्थानों पर लोग रैली को देखने के लिए रुक गए और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। कर्मा नृत्य के माध्यम से आदिवासी समाज की समृद्ध लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरत तस्वीर सामने आई। रैली के दौरान यह दृश्य नगरवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेडियम पहुंची महारैली :-

नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए महारैली पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेडियम पहुंची। यहां हजारों समाजजनों की मौजूदगी में मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्टेडियम पहुंचने पर भी रैली का उत्साह देखते ही बना। पूरे आयोजन में आदिवासी समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक गौरव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। महारैली ने सक्ती में न केवल आदिवासी समाज की विशाल एकजुटता का प्रदर्शन किया, बल्कि संस्कृति, परंपरा और सामाजिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी संदेश भी दिया। ढोल-मांदर की गूंज और कर्म नृत्य की थिरकन के साथ निकली यह महारैली लंबे समय तक नगरवासियों के बीच चर्चा का विषय बनी रही।

Related Articles

Back to top button