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बिना नगर पालिका की अनुमति घनी आबादी के बीच खड़ा किया जा रहा मोबाइल टावर! वार्ड 15 में मचा बवाल, ठेकेदार की गुंडागर्दी से दहशत

सक्ती  नगर के वार्ड क्रमांक 15 स्थित ऑफिसर कॉलोनी में बिना नगर पालिका की अनुमति के घनी आबादी के बीच मोबाइल टावर स्थापित किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। चारों ओर मकानों से घिरे आवासीय क्षेत्र में टावर खड़ा किए जाने से क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। मोहल्लेवासियों ने अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार एवं नगर पालिका परिषद सक्ती के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर तत्काल निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की है।

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि बिना नगर पालिका की अनुमति और आवश्यक नियमों का पालन किए मोबाइल टावर का निर्माण कराया जा रहा है। जब मोहल्लेवासियों ने इसका विरोध किया तो ठेकेदार द्वारा दबाव बनाने और गुंडागर्दी करने का प्रयास किया गया, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल निर्मित हो गया है।

नियमों की उड़ रही धज्जियां!

दूरसंचार विभाग (DoT) एवं स्थानीय नगरीय निकायों के नियमों के अनुसार मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए स्थानीय नगर निकाय की अनुमति (NOC), स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट, वैध दस्तावेज और स्थानीय नागरिकों की आपत्तियों पर विचार करना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद वार्ड क्रमांक 15 में कथित रूप से इन नियमों को दरकिनार कर निर्माण कार्य किया जा रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नगर पालिका परिषद सक्ती के मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रहलाद पांडे ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नगर पालिका द्वारा उक्त मोबाइल टावर के लिए किसी भी प्रकार की अनुमति या एनओसी जारी नहीं की गई है।

सीएमओ बोले – लोगों की जान से खिलवाड़ नहीं होने देंगे

सीएमओ प्रहलाद पांडे ने कहा, “नगर पालिका से कोई अनुमति या एनओसी जारी नहीं की गई है। यदि मोहल्लेवासियों एवं वार्ड पार्षद की आपत्ति है तो इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा और भविष्य में खतरा उत्पन्न करने वाला कोई भी कार्य नहीं होने दिया जाएगा।”

पार्षद रिक्की सेवक ने जताई कड़ी आपत्ति

वार्ड क्रमांक 15 के पार्षद रिक्की सेवक ने भी मोबाइल टावर स्थापना पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि घनी आबादी के बीच बिना नगर पालिका की अनुमति एवं जनसहमति के टावर लगाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य रुकवाने और मामले की जांच कराने की मांग की है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर पालिका ने अनुमति ही नहीं दी, तो आखिर किसके संरक्षण में टावर खड़ा किया जा रहा है? यदि नियमों को ताक पर रखकर कार्य किया जा रहा है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी, इस पर पूरे शहर की निगाहें टिकी हुई हैं।

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