सक्ती राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर न्यायालय परिसर में प्रातः ८ बजे प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती लीना अग्रवाल ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया ,तब भारत माता की जय…वंदे मातरम के उद्घोष के साथ राष्ट्र गान जन गण मन … एवं राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का सामूहिक गान हुआ ।
पश्चात जिला अधिवक्ता संघ के सायुज्य में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें अधिवक्ता साथियों के साथ नगर के गणमान्य जनों ने अपने शानदार प्रस्तुतियों से लोगों को भाव विभोर कर दिया तो वहीं न्यायाधीश प्रशांत शिवहरे ने अपने मधुर स्वर में, जिस देश में गंगा बहती है उस देश का वासी हूं… गीत गाकर लोगों को झूमने को मजबूर कर दिया तथा अधिवक्ता भुनेश्वर यादव के देशभक्ति गीत अब की बरस… ने लोगों में जोश भर दिया।
संबोधन के क्रम में प्रथम अतिरिक्त न्यायाधीश श्रीमती लीना अग्रवाल ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर आप सभी के शानदार प्रस्तुति ने आज के दिवस को यादगार बना दिया , तो वहीं विशेष न्यायाधीश श्रीमती गंगा पटेल ने आयोजन को तारीफ ए काबिल बताते हुए कहा कि भविष्य में भी यह परंपरा बनी रहे। न्यायाधीश प्रशांत शिवहरे ने आशीर्वचन उद्बोधन में कहा कि संभवतः इस न्यायालय परिसर के अंतिम राष्ट्रीय कार्यक्रम एक अविस्मरणीय पल है क्योंकि हम सब चंद माह बाद एक नए स्थान पर नवीन न्यायालय भवन में नई ऊर्जा के साथ प्रवेश करेंगे जिसके लिए सबको अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं…
अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि अगर अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक न्याय सुलभ होगी तो निश्चित रूप से हमारे लोकतंत्रात्मक गणराज्य की कल्पना साकार हो सकेगी तो वहीं पूर्व अध्यक्ष दिगम्बर चौबे ने कहा कि आज का कार्यक्रम अधिवक्ता संघ और न्याय परिवार के परस्पर सौहाद्र_प्रेम का प्रतीक है तथा भविष्य में भी यह परंपरा बनी रहेगी।
गणतंत्र दिवस कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए अधिवक्ता संघ के सचिव सुरीत चंद्रा ने आयोजन की सफलता के लिए अधिवक्ताओं के सहयोग को आवश्यक बताया तो वहीं पूर्व अध्यक्ष ऋषिकेश चौबे ने आभार प्रदर्शन करते हुए न्यायिक परिवार, अधिवक्ता संघ एवं कर्मचारियों सक्रिय सहभागिता के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
अंत में संघ के प्रभारी अध्यक्ष संजय अग्रवाल के साथ मंचासिन अतिथियों ने कार्यक्रम में सभी अदाकारों के साथ ही न्यायाधीश गण को स्मृति चिन्ह के रूप लेखनी भेंट किया।
इन पलों में खगेश्वर चौबे, दादू चंद्रा, अरविंद भारद्वाज, धर्मेंद्र सोन, त्रिभुवन जांगड़े, हेमलता राठौर, कृष्ण कुमार देवांगन आदि अधिवक्ताओं के साथ रीडर सुनील कैथवास ने भी अपने सुमधुर गीतों से गणतंत्र दिवस को ऐतिहासिक बना दिया।
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