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गौवंश की सेवा उपचार  एवं उनका सरंक्षण नितांत है आवश्यक;;

   सक्ती  जिले में मानसून के दौरान लगातार सड़क दुर्घटनाओं एवं गौवंशों पर कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। वर्तमान में  जानकारी के अनुसार 23 से अधिक गौवंश ऐसे हैं, जिन्हें अभी तक स्थायी आश्रय नहीं मिल पाया है और जो उपचार एवं संरक्षण के लिए आश्रित हैं। इन पीड़ित गौवंशों की सेवा, उपचार एवं देखभाल अत्यंत आवश्यक है।

गौ सेवा समिति सक्ती द्वारा निजी भूमि पर संचालित आश्रय स्थल में वर्तमान में 17 गंभीर रूप से घायल एवं बीमार गौवंशों की नियमित सेवा और चिकित्सा की जा रही है। सीमित संसाधनों एवं कम संख्या में उपलब्ध गौसेवकों के बावजूद निरंतर सेवा कार्य जारी है। आज समाज का एक बड़ा वर्ग विभिन्न व्यसनों एवं अन्य समस्याओं में उलझा हुआ है, जिसके कारण धर्म एवं जीव सेवा के प्रति अपेक्षित सहभागिता नहीं मिल पा रही है।

वर्तमान परिस्थितियों में सड़कों पर घूम रहे निराश्रित गौवंशों की सुरक्षा के लिए रेडियम बेल्ट जैसे छोटे-छोटे प्रयास ही सहारा बने हुए हैं। किंतु यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

सक्ती जिले के समस्त उद्योगपतियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं शासन-प्रशासन से गौ सेवकों ने मार्मिक अपील की है कि इस गंभीर विषय पर संवेदनशीलता के साथ ध्यान दें। उन्होंने कहा है कि गौ माता हमारे सनातन धर्म, संस्कृति और आस्था का अभिन्न अंग हैं। हमारी परम पूज्य गौ माताएं एवं नंदी बाबा आज असुरक्षा, दुर्घटनाओं और पीड़ा से गुजर रहे हैं।

सक्ती नगर में एक भव्य, सुव्यवस्थित एवं अन्य जिलों के लिए प्रेरणास्रोत गौशाला की स्थापना समय की आवश्यकता है, जिससे सड़कों पर निराश्रित घूम रहे गौवंशों को सुरक्षित आश्रय मिल सके तथा घायल एवं पीड़ित गौवंशों का समुचित उपचार एवं संरक्षण हो सके। हमारी जानकारी के अनुसार वर्तमान में 23 गौवंश गंभीर पीड़ा का जीवन जी रहे हैं और केवल एक सुरक्षित आश्रय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

आइए, हम सब मिलकर गौ सेवा, गौ सुरक्षा और गौ सम्मान के इस पुनीत कार्य में अपना अमूल्य योगदान दें

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