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जिले में इस वर्ष आम के बेहतर उत्पादन की संभावना

उद्यानिकी विभाग ने किसानों को दी आवश्यक सलाह                                                   सक्ती, जिले के शासकीय उद्यान रोपणियों एवं गांवों की अमराइयों में इन दिनों आम के बौरों की सुगंध फैलने लगी है। पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष आम के पेड़ों पर मंजरियां अधिक सघन, स्वस्थ और प्रचुर मात्रा में दिखाई दे रही हैं। जिले में आम की प्रमुख प्रजातियां दशहरी, चौसा, आम्रपाली एवं लंगड़ा के पेड़ इन दिनों पूरी तरह फूलों से आच्छादित हैं। अनुकूल मौसम और बेहतर मंजरियों की स्थिति को देखते हुए इस वर्ष आम के अच्छे उत्पादन की संभावना व्यक्त की जा रही है। उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को आम की बेहतर उपज के लिए आवश्यक सलाह दी जा रही है। विभाग के अनुसार यदि किसान समय-समय पर उचित प्रबंधन अपनाएं, तो आम की उपज में लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि की जा सकती है। किसानों को अपने बगीचों का नियमित निरीक्षण करते रहना चाहिए, ताकि रोग एवं कीट-व्याधि के प्रकोप को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। बौर आने की अवस्था में सिंचाई रोक देनी चाहिए और तब तक पानी नहीं देना चाहिए जब तक फूल पूरी तरह न खिल जाएं। अधिक सिंचाई करने से नई पत्तियां निकलने लगती हैं, जिससे बौर झड़ने की संभावना बढ़ जाती है। जब आम के फल मटर के दाने के आकार के हो जाएं, तब हल्की सिंचाई शुरू कर मिट्टी में नमी बनाए रखना उचित होता है। फूल खिलने की अवस्था में कीटनाशकों का छिड़काव नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे परागण करने वाले कीटों एवं मधुमक्खियों को नुकसान पहुंच सकता है। यदि मैंगो हॉपर कीट का प्रकोप अधिक हो तो शाम के समय इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव किया जा सकता है। बौर पर सफेद पाउडर जैसे लक्षण दिखाई देने पर यह पाउडरी मिल्ड्यू रोग का संकेत हो सकता है, जिसकी रोकथाम के लिए घुलनशील गंधक का छिड़काव लाभकारी होता है। वहीं बौर पर काले धब्बे दिखाई देने पर एंथ्रेक्नोज रोग की आशंका रहती है, जिसके नियंत्रण के लिए कार्बेन्डाजिम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करना चाहिए। फूलों के झड़ने को रोकने और फल सेटिंग में सुधार के लिए बोरान एवं पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव लाभदायक माना जाता है। जब फल मटर के दाने के बराबर हो जाएं, तब प्लानोफिक्स हार्मोन का छिड़काव करने से फलों का गिरना कम किया जा सकता है। उद्यानिकी विभाग ने किसानों से इन सलाहों का पालन करने की अपील की है, ताकि आम के उत्पादन में वृद्धि हो सके। अधिक जानकारी के लिए किसान नजदीकी उद्यानिकी विभाग से संपर्क कर सकते हैं।

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