सक्ती ,भौतिक सत्यापन (PV) मोबाइल एप्प की व्यवहारिक समस्याओं के निराकरण, लंबित पदोन्नति एवं वेतन विसंगति सहित विभिन्न मांगों को लेकर राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ का अनिश्चितकालीन हड़ताल आज दसवें दिन भी जारी रहा। प्रदेश के समस्त जिलों में पटवारी अपनी जायज मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर शासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
पटवारियों के हड़ताल पर चले जाने से आम जनता से जुड़े राजस्व एवं प्रशासनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित होने लगे हैं। इनमें आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र संबंधी प्रतिवेदन, नामांतरण, बंटवारा, निर्वाचन संबंधी कार्य, जनगणना, फसल कटाई प्रयोग, न्यायालयीन प्रतिवेदन, सीमांकन एवं भूमि नाप जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त आगामी धान खरीदी व्यवस्था पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
PV एप्प की व्यवहारिक समस्याओं से किसानों के अभिलेखों पर संकट
संघ का कहना है कि PV एप्प की मूलभूत एवं व्यवहारिक समस्याओं का निराकरण किए बिना पटवारियों पर इसके माध्यम से कार्य करने का दबाव बनाया जा रहा है। पटवारियों द्वारा PV एप्प में कार्य करने से मना किए जाने के बाद शासन-प्रशासन द्वारा निजी सर्वेयरों के माध्यम से भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि PV एप्प में मुख्य रूप से ऐसे खसरे शामिल किए गए हैं, जिनका नक्शा अथवा नक्शा बटांकन उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में निजी सर्वेयर आखिर किस आधार पर खेतों एवं खसरों की सही पहचान कर उनका सत्यापन कर रहे हैं, यह एक गंभीर प्रश्न है। खसरों की वास्तविक पहचान राजस्व अभिलेखों, भौतिक परिस्थितियों एवं किसानों की उपस्थिति में ही सुनिश्चित की जा सकती है। ऐसे में राजस्व अभिलेखों की पर्याप्त जानकारी के बिना निजी सर्वेयरों द्वारा किया जा रहा सर्वेक्षण कितना विश्वसनीय एवं त्रुटिरहित होगा, इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
संघ ने यह भी चिंता व्यक्त की है कि कई स्थानों पर एक ही जगह खड़े होकर सर्वेयरों द्वारा अनेक खसरों का सत्यापन किया जा रहा है। ऐसी प्रक्रिया से तैयार होने वाले लोकेशन एवं पॉलीगॉन की सटीकता संदिग्ध है। इन्हीं लोकेशन एवं पॉलीगॉन को आगे डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) के सर्वर में भेजा जाएगा, जहां पुनः सर्वेयरों द्वारा फसल का सत्यापन किया जाएगा। जब मूल पॉलीगॉन ही गलत अथवा वास्तविक खेत की स्थिति से अलग होगा, तो उसके आधार पर किया जाने वाला फसल सत्यापन भी त्रुटिपूर्ण होने की आशंका रहेगी।
इसका सीधा असर किसानों के भूमि एवं फसल संबंधी अभिलेखों, धान खरीदी तथा भविष्य में शासन की विभिन्न योजनाओं के लाभ पर पड़ सकता है। संघ का स्पष्ट मत है कि तकनीक का उपयोग किसानों की सुविधा एवं राजस्व अभिलेखों की शुद्धता के लिए होना चाहिए, न कि केवल लक्ष्य पूर्ति के लिए।
राजस्व निरीक्षक पदोन्नति में पटवारियों को मिले उचित अवसर
पटवारियों की एक प्रमुख मांग राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति से संबंधित है। वर्तमान व्यवस्था में राजस्व निरीक्षक के पद विभागीय परीक्षा एवं सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाने का प्रावधान है। जबकि राजस्व निरीक्षक का पद पूर्णतः अनुभव एवं मैदानी कार्यों की समझ से जुड़ा हुआ है। राजस्व अभिलेखों, भूमि संबंधी विवादों, सीमांकन एवं मैदानी राजस्व कार्यों का वर्षों का अनुभव रखने वाले पटवारियों से बेहतर इस कार्य की व्यावहारिक समझ किसी अन्य को नहीं हो सकती।
संघ की मांग है कि राजस्व निरीक्षक के पदों पर सीधी भर्ती समाप्त कर 50 प्रतिशत पद वरिष्ठता के आधार पर अनुभवी पटवारियों से तथा शेष 50 प्रतिशत पद विभागीय परीक्षा के माध्यम से भरे जाएं, ताकि वर्षों से सेवा दे रहे पटवारियों को उनका उचित अधिकार एवं पदोन्नति का अवसर मिल सके।
इसी प्रकार वेतन विसंगति को दूर करने के लिए भी संघ लगातार प्रयास कर रहा है किंतु विसंगति दूर नही हो पाया है।
संचालक भू-अभिलेख से चर्चा बेनतीजा
संघ प्रतिनिधिमंडल की संचालक भू-अभिलेख से इस संबंध में चर्चा भी हुई है, लेकिन दुर्भाग्यवश इस चर्चा का अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। इससे पटवारियों में निराशा एवं असंतोष बढ़ता जा रहा है।
राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ का कहना है कि पटवारी शासन की राजस्व व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण मैदानी कड़ी हैं। उनकी समस्याओं एवं जायज मांगों की अनदेखी कर उनसे कार्य करवाना न तो व्यावहारिक है और न ही जनहित में उचित है।
संघ शासन से मांग करता है कि PV एप्प की व्यवहारिक समस्याओं का तकनीकी एवं व्यावहारिक समाधान किया जाए, राजस्व निरीक्षक पदोन्नति में पटवारियों को उचित अवसर प्रदान किया जाए तथा वेतन विसंगति का शीघ्र निराकरण किया जाए। साथ ही हड़ताल के दौरान पटवारियों पर की जा रही दबावपूर्ण एवं दंडात्मक कार्यवाहियों पर रोक लगाई जाए।
संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक मांगों पर सकारात्मक एवं ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।




