ग्राम पंचायत पोरथा का मामला
सक्ती ; जनपद पंचायत सक्ती अंतर्गत ग्राम पंचायत पोरथा में प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितता और भ्रष्टाचार किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। ग्रामवासियों और हितग्राहियों ने जिला पंचायत सक्ती के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को विस्तृत लिखित शिकायत सौंपते हुए सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, मेट सहित अन्य लोगों पर गरीब हितग्राहियों की मजदूरी राशि का गबन करने का आरोप लगाया है। शिकायत सामने आने के बाद पंचायत और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों को मनरेगा से मिलने वाली मजदूरी राशि को बिना जानकारी और सहमति के पंचायत प्रतिनिधियों और उनके करीबी लोगों के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, राशि की वसूली कर गरीब हितग्राहियों को वापस दिलाने और कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।
भारत सरकार की वेबसाइट से मिली जानकारी के बाद खुला मामला :-
शिकायतकर्ताओं ने आवेदन में उल्लेख किया है कि यह मामला भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की वेबसाइट से प्राप्त दस्तावेजों और ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच के दौरान सामने आया। ग्रामीणों का कहना है कि जब प्रधानमंत्री आवास योजना के भुगतान और जॉब कार्ड की जानकारी निकाली गई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से हितग्राहियों की मजदूरी राशि दूसरे खातों में डालकर आर्थिक लाभ लिया गया। आवेदन में कई जॉब कार्ड नंबरों और खातों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है।
सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और मेट पर मिलीभगत का आरोप :-
शिकायत पत्र में ग्राम पंचायत पोरथा के सरपंच लोकनाथ राठौर, सचिव राजकुमार गवेल, रोजगार सहायक और मेट पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन लोगों ने आपसी सांठगांठ कर गरीब हितग्राहियों की मजदूरी राशि अपने रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में ट्रांसफर कराई। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पंचायत के जिम्मेदार लोगों ने अपने परिवार और चहेतों के नाम जॉब कार्ड बनवाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि कई मामलों में जिन लोगों के नाम पर भुगतान हुआ, उनका वास्तविक मजदूरी कार्य से कोई संबंध नहीं था।
अविवाहित बेटे-बेटियों और रिश्तेदारों के नाम पर जॉब कार्ड बनाने का आरोप :-
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि सरपंच द्वारा अपने अविवाहित बेटे-बेटियों और रिश्तेदारों के नाम पर जॉब कार्ड तैयार कराए गए। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि इन्हीं खातों में प्रधानमंत्री आवास हितग्राहियों की मजदूरी राशि ट्रांसफर कर आर्थिक लाभ लिया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत के प्रभावशाली लोगों ने गरीब हितग्राहियों की अनभिज्ञता का फायदा उठाकर योजना की राशि अपने नियंत्रण वाले खातों में डलवाई। इससे वास्तविक हितग्राही योजना के लाभ से वंचित रह गए।
नाबालिगों के नाम जोड़ने का भी गंभीर आरोप :-
मामले में सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि कुछ जॉब कार्डों में नाबालिग बच्चों के नाम भी जोड़ दिए गए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ऐसे बच्चों के नाम पर मजदूरी भुगतान दिखाया गया जो मजदूरी कार्य करने की उम्र में ही नहीं हैं। ग्रामीणों ने इसे शासन के नियमों का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा कि यदि पूरे रिकॉर्ड की तकनीकी जांच कराई जाए तो और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। आवेदन में कहा गया है कि कई भुगतान ऐसे खातों में गए जिनका वास्तविक मजदूरों और हितग्राहियों से कोई संबंध नहीं था।
हितग्राहियों को नहीं मिली मजदूरी, अधूरे पड़े आवास :-
पोरथा पंचायत के ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों के लिए आशा की किरण मानी जाती है, लेकिन पंचायत स्तर पर हुई कथित गड़बड़ी के कारण कई हितग्राही आर्थिक संकट में आ गए।
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि मजदूरी राशि नहीं मिलने के कारण कई गरीब परिवार अपने आवास निर्माण कार्य को पूरा नहीं कर पाए। कई मकान अधूरे पड़े हैं और हितग्राही कर्ज लेकर निर्माण कार्य कराने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने कहा कि शासन की महत्वाकांक्षी योजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया।
जांच समिति गठित कर कार्रवाई की मांग :-
शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच के लिए जिला स्तरीय समिति गठित की जाए। साथ ही पंचायत के बैंक खातों, जॉब कार्ड रिकॉर्ड, भुगतान विवरण और हितग्राहियों के खातों की जांच कराई जाए। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए तथा गबन की गई राशि वापस लेकर वास्तविक हितग्राहियों को दिलाई जाए।
जिलाधीश एवं पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई शिकायत :-
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ताओं ने आवेदन की प्रतिलिपि कलेक्टर सक्ती और पुलिस अधीक्षक सक्ती को भी भेजी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च स्तर पर भी शिकायत करेंगे। अब पूरे मामले में जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी हुई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े भ्रष्टाचार के रूप में सामने आ सकता है।
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मामले के बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं है। इस सम्बन्ध में पता कर बता पाऊंगा। गलत हुआ है तो कार्रवाई जरूर होगी।
निखिल कश्यप
सीईओ, जनपद पंचायत, सक्ती





