सक्ती/लिमतरा : रक्षाबंधन के दूसरे दिन ग्राम पंचायत लिमतरा में परम्परा और लोक संस्कृति के संगम का अनोखा नजारा देखने को मिला। गांव की महिलाओं और युवतियों द्वारा कर्मा नृत्य के साथ विधि-विधान से भोजली विसर्जन किया गया।
क्या हुआ कार्यक्रम में:
शनिवार शाम जैसे ही भोजली विसर्जन की बेला आई, गांव की 50 से अधिक महिलाओं ने सिर पर भोजली की टोकरी रखकर मांदर और ढोल की थाप पर कर्मा नृत्य शुरू किया।

“भोजली-भोजली ले चलबो, गंगा मैया के जाबो” के छत्तीसगढ़ी गीतों के साथ पूरा गांव गूंज उठा। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीत गाते हुए तालाब किनारे पहुंचकर भोजली का विसर्जन किया और एक-दूसरे को भोजली देकर दीर्घायु की कामना की।
क्या है भोजली की परम्परा:
छत्तीसगढ़ में सावन में बहनें मिट्टी की टोकरी में गेहूं बोती हैं और रक्षाबंधन तक उसकी देखभाल करती हैं। जिसे भोजली कहा जाता है। रक्षा बंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने के बाद भाई को भोजली देकर उसकी लंबी उम्र की प्रार्थना की जाती है और दूसरे दिन इसे तालाब में विसर्जित कर दिया जाता है।
लिमतरा के ग्रामीणों में दिखा उत्साह:
इस अवसर पर पंचायत की सरपंच श्री मती मालती भारद्वाज एवं, पंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्राम के बुजुर्गों ने कहा कि ऐसी परम्पराएं ही हमारी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की पहचान हैं। युवाओं में इस तरह का उत्साह देखकर खुशी होती है।
कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया और सभी ने भाई-बहन के अटूट प्रेम के इस पावन पर्व को हर्षोल्लास से मनाया।




