सक्ती। छत्तीसगढ़ प्रदेश में सबसे ज्यादा धान की फसल के लिये मशहूर सक्ती जिले में धान खरीदी की व्यवस्था लड़खड़ाते हुई दिख रही है। एक ओर सरकार किसानों के हित में बड़े-बड़े दावे कर रही है, तो वहीं दूसरी ओर सक्ती जिले की धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है। जिले के धान खरीदी केंद्रों में हजारों क्विंटल धान उठाव के इंतजार में पड़ा है, जिससे केंद्रों में भारी जाम की स्थिति बन गई है। आपको बता दें कि सक्ती जिले में सक्ती छेत्र के आस पास जो खरीदी केंद्र( सोसायटी) है सिर्फ उन सोसायटियों से ही धान का सही उठाव ही पा रहा है,,किंतु जिले के अंतिम छोर जैजैपुर,, हसौद तरफ धान खरीदी केंद्रों में बहुत ही बुरा हाल है,धान उठाव नहीं होने से समिती के प्रबंधक सहित ख़रीदी प्रभारी भी बहुत परेशान है। जैजैपुर ब्लाक अन्तर्गत मुक्ता पंजीयन क्रमांक 888 ख़रीदी केंद में लगभग 12000 किविंटल धान फड़ में जाम पड़ा हुआ है वहीं हसौद ब्लाक के अंतर्गत प्रायः सभी केंद्रों की हालत दयनीय स्थिति में है।
हालात इतने खराब हैं कि कई खरीदी केंद्रों में धान रखने की जगह तक नहीं बची है। मजबूरी में किसानों का धान खुले आसमान के नीचे रखा जा रहा है। अगर मौसम बिगड़ा तो नुकसान का जिम्मेदार कौन होगा यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
धान उठाव नहीं होने से नए किसानों की खरीदी भी ठप पड़ती जा रही है। खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था इतनी बढ़ चुकी है कि कभी भी बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक जिला विपणन अधिकारी एंव मिलरों की मनमानी, परिवहन की लापरवाही और प्रशासनिक सुस्ती के चलते धान का उठाव प्रभावित हो रहा है। जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागजी आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात जस के तस बने हुए हैं।
अगर जल्द ही धान उठाव की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो इसका सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ेगा। सवाल यह है कि क्या प्रशासन नींद से जागेगा या धान ख़रीदी प्रभारी यूं ही परेशान होते रहेंगे।





