सक्ती– नवरात्रि के अंतिम दिन विजयादशमी के पावन पर्व पर मां दुर्गा को विदाई देते हुए रेलवे स्टेशन परिसर में एक अनूठे और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान क्षेत्र की महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से ‘सिंदूर खेला’ (सिंदूर खेला) की रस्म निभाकर मां को अश्रुपूर्ण और हर्षोल्लास के साथ विदाई दी।
पारंपरिक वेशभूषा में सजीं महिलाएं
कार्यक्रम की शुरुआत मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना और आरती के साथ हुई। इसके बाद लाल पाड़ की पारंपरिक सफेद साड़ियों में सजी महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुहाग और अखंड सौभाग्य की कामना की। इस दौरान पूरा रेलवे स्टेशन परिसर बंगाली परंपरा और भक्ति के रंगों में सराबोर नजर आया। महिलाओं ने ढोल-ताशों की थाप और मां के जयकारों के बीच एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया।
आपसी भाईचारे और संस्कृति का अनूठा संगम
आयोजकों ने बताया कि रेलवे स्टेशन परिसर जैसे सार्वजनिक और व्यस्त स्थान पर इस प्रकार का आयोजन करने का उद्देश्य लोगों में आपसी प्रेम, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देना था। यात्रा कर रहे कई यात्री भी इस भव्य और पारंपरिक आयोजन को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए और इस उत्सव का हिस्सा बने।
मां से की सुख-समृद्धि की कामना
सिंदूर खेला के इस रस्मी उत्सव में शामिल महिलाओं ने कहा कि मां दुर्गा का यह पर्व हमें नारी शक्ति और सकारात्मकता का संदेश देता है। उन्होंने मां से प्रार्थना की कि वे अगले साल फिर से आएं और सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखें। इस अवसर पर श्रीमती कलावती लोधी,अनीता सिंह, निधी सिंह, मृदुला सिंह, अनीता राठौर, विजया जायसवाल, राखी जायसवाल, आशा जायसवाल, रीता राज, ललिता साहू, पूनम साहू,रानी साहू,कलेश्वरी , मीरा देवांगन, पूनम यादव,श्रीमती नीता सिन्हा श्रीमती रीना श्रीमती संगीता सिन्हा श्रीमती जया भट्टाचार्य अदिति बनर्जी श्रीमती पटेल श्रीमती मोना श्रीमती सुब्ररा भोमीक एवं रेलवे स्टाफ की अनेक महिलाएं शामिल हुई।
कार्यक्रम के अंत में महिलाओं ने एक-दूसरे को विजयदशमी की बधाई दी और अगले वर्ष फिर से मां के आगमन की आस के साथ उत्सव का समापन किया।





