दर्री तालाब का किनारा महीनों से धंसा, सौन्दर्यकरण के नाम पर लाखों फूंकने वाली नगर पालिका मौन, जनप्रतिनिधि भी आंखें मूंदे
सक्ती / नगर के प्रतिष्ठित माँ महामाया मंदिर को जाने वाली मुख्य सड़क अब एक जानलेवा चुनौती बन गई है। यह सड़क दर्री तालाब के किनारे से होकर गुजरती है, जिसका एक हिस्सा पिछले कई महीनों से पूरी तरह से धंसकर पानी में समा चुका है। हालात इतने भयावह हैं कि सड़क के एक किनारे की ऊपरी सतह ही बची है, जिसके नीचे की मिट्टी पूरी तरह से बह चुकी है। यह स्थिति किसी भी समय एक बड़े हादसे को दावत दे रही है।

*महामाया मंदिर: आस्था का केंद्र, पर राह है मुश्किल*
महामाया मंदिर, जिसे सक्ती महारानी का मंदिर भी कहा जाता है, न केवल सक्ती नगर बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए भी अगाध आस्था का केंद्र है। मुख्य द्वार (साईं मंदिर) से महामाया मंदिर की ओर जाने वाला यह रास्ता हमेशा ही भक्तों के आवागमन से गुलज़ार रहता है। इसी रास्ते से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल और दुपहिया व छोटे चार पहिया वाहनों से मंदिर पहुँचते हैं। लेकिन, दर्री तालाब के किनारे सड़क की इस खस्ताहाल हालत ने भक्तों के लिए इस यात्रा को जोखिमभरा बना दिया है।
*सौन्दरिकरण के नाम पर लाखों फूंका गया*
सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय नगर पालिका परिषद ने पूर्व में दर्री तालाब के सौन्दरिकरण के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए थे। इस राशि का उपयोग तालाब के किनारे को मजबूत करने और सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए किया जाना था। लेकिन, सड़क के इस हाल को देखकर स्पष्ट है कि निर्माण कार्य अत्यंत घटिया स्तर का और “खोखला” था। सौन्दरिकरण के नाम पर किए गए इस खर्च का खामियाजा आज आम जनता को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है।
: अनजान बना प्रशासन और मौन हैं जनप्रतिनिधि
दर्री तालाब का यह हिस्सा महीनों पहले धंस चुका है। स्थानीय निवासियों और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं ने कई बार इस समस्या की ओर नगर पालिका परिषद और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया, लेकिन सभी ने जैसे अपनी आँखें मूंद ली हैं। किसी भी जनप्रतिनिधि को यह “मौत का गड्ढा” दिखाई नहीं दे रहा है, जो कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।
यह विडंबना ही है कि चुनाव के समय, नवरात्रि के पावन अवसर पर या किसी अन्य उत्सव पर, हर एक नेता अपना नामांकन दाखिल करने या जीत के बाद आशीर्वाद लेने के लिए इसी महामाया मंदिर के दर पर पहुँचता है, लेकिन इनमें से किसी को भी मंदिर जाने वाली सड़क की यह जर्जर हालत और भक्तों की सुरक्षा की चिंता दिखाई नहीं देती।
*”नवागंतुक” के लिए है “काल”*
स्थानीय निवासियों को तो सड़क की इस स्थिति के बारे में जानकारी है, इसलिए वे सावधानी बरतते हैं। लेकिन, जो श्रद्धालु पहली बार या नए शहर से यहाँ महामाया मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं, उनके लिए यह सड़क किसी “काल” से कम नहीं है। यदि कोई नया व्यक्ति यहाँ आकर गाड़ी पार्क करने की कोशिश करता है या फिर किसी अन्य वाहन को क्रॉस करने के लिए थोड़ा सा भी किनारे जाता है, तो वह सीधे तालाब में गिर सकता है, जिससे एक बड़ी दुर्घटना घट सकती है।
*तालाब: आस्था और विसर्जन का केंद्र*
दर्री तालाब केवल एक तालाब नहीं है, बल्कि यह भी एक आस्था का केंद्र है। नवरात्रि पर्व पर माँ दुर्गा की भव्य मूर्तियों का विसर्जन और महामाया मंदिर का ज्वारा भी इसी तालाब में विसर्जित होता है। इसके बाद भी, न तो तालाब की सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है और न ही इसके किनारे की सुरक्षा पर। यह आस्था और जन सुरक्षा दोनों के प्रति प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की घोर लापरवाही को दर्शाता है। क्या नगर पालिका परिषद और स्थानीय जनप्रतिनिधि किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार कर रहे हैं? क्या सुंदरीकरण के नाम पर किए गए खर्च की कोई जवाबदेही नहीं है? कब तक श्रद्धालु और आम जनता अपनी जान हथेली पर रखकर इस रास्ते से गुजरती रहेगी।





